स्वास्थ्य खबर कोरोना के गंभीर मरीज को डिलेरियम लाख का खतरा ज्यादा

Severe COVID-19 Can Lead To Delirium: हमारे जीवन में कोरोना का खौफनाक असर कब तक रहेगा, यह कोई नहीं जानता लेकिन अक्सर इसके दुष्परिणाम सामने आते रहते हैं. कई रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि कोरोना मरीजों में साल भर बाद भी कई लक्षण मौजूद रहते हैं. कुछ मरीजों को अन्य तरह की समस्याएं भी परेशान करने लगती हैं. अब एक ताजा रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कोरोना से पीड़ित गंभीर मरीजों को डेलीरियम (delirium) नामक बीमारी का खतरा है.  डेलीरियम एक प्रकार का मानसिक रोग है जिसमें व्यक्ति हमेशा भ्रमित रहता है. इसमें मरीज की मानसिक स्थिति बहुत खराब हो जाती है और वह हमेशा कंफ्यूज रहता है. इस बीमारी में मरीज कोई भी चीज सही से सोच नहीं पाता है.

एनडीटीवी की खबर के मुताबिकअमेरिका में महामारी की शुरुआत में ही अस्पताल में भर्ती हुए कोरोना के 150 मरीजों पर किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है. अध्ययन में पाया गया है कि कोरोना की गंभीर बीमारी से पीड़ित 73 प्रतिशत मरीजों को डेलीरियम बीमारी थी. यह अध्ययन बीएमजे ओपन (BMJ Open)जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

हाई ब्लडप्रेशर और डायबिटीज भी
अध्ययन में यह भी पाया गया कि डेलीरियम के बाद मरीज हाई ब्लडप्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियों से भी पीड़ित हो जाते हैं और उनमें कोविड-19 संबंधी लक्षण अधिक गंभीर दिखाई देते हैं. अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन (University of Michigan) के प्रोफेसर और अध्ययन के लेखक फिलिप व्लीसाइड्स ने कहा, कोविड का संबंध कई अन्य जटिलताओं से भी है जिससे लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ सकता है. इस स्थिति में जल्दी स्वस्थ होना मुश्किल हो जाता है. शोधकर्ताओं ने मार्च और मई 2020 के बीच आईसीयू में भर्ती रहे मरीजों के एक समूह को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उनके मेडिकल रिकॉर्ड्स और पूछताछ पर आधारित एक सर्वेक्षण का विश्लेषण करते हुए यह निष्कर्ष निकाला.

अवसादग्रस्त होने की आशंका
अध्ययन में पाया गया कि करीब एक चौथाई मरीज अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी डेलीरियम से पीड़ित थे. कुछ मरीजों में ये लक्षण महीनों तक मौजूद रहे. शोधकर्ताओं के मुताबिक इस स्थिति में अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद स्वस्थ होने की प्रक्रिया और अधिक मुश्किल हो सकती है. फिलिप ने कहा कि अध्ययन के नतीजों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि कोविड-19 के गंभीर लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती हुए मरीजों के अवसाद ग्रस्त और डेलीरियम से पीड़ित होने की आशंका बहुत अधिक रहती है. उन्होंने कहा, ‘कुल मिलाकर यह अध्ययन दिखाता है कि क्यों टीका लगवाना और गंभीर रूप से बीमार पड़ने से बचना इतना महत्वपूर्ण है. इससे बाद में तंत्रिका संबंधी दीर्घकालीन असर हो सकता है.

क्यों होती है डेलीरियम की बीमारी
जब दिमाग में ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो जाती है तो डेलीरियम की स्थिति आ सकती है. इस परिस्थिति में दिमाग में खून के थक्के जमने लगते हैं. इससे दिमाग में आघात भी आ सकता है जिससे सोचने-समझने की क्षमता जा सकती है. डेलीरियम के मरीज के दिमाग में सूजन बढ़ सकती है, जिससे भ्रम और बेचैनी बढ़ जाएगी.

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *