सेना में होता है महिलाओं का यौन उत्पीड़न, इस देश की रक्षा मंत्री को मांगनी पड़ी माफी

टोरंटो​: कनाडा की भारतीय मूल की रक्षा मंत्री अनिता आनंद और शीर्ष सैन्य कमांडर ने यौन शोषण, यौन उत्पीड़न या भेदभाव का शिकार रहे कनाडाई सशस्त्र बलों के मौजूदा और पूर्व सदस्यों से माफी मांगी है. इस माफी का लंबे वक्त से इंतजार किया जा रहा था.

कनाडा की सेना ऐसे वक्त में यौन दुव्यर्वहार के आरोपों से निपटने और इन्हें रोकने दोनों के लिए बेहतर व्यवस्था बनाने के सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव का सामना कर रही है जब आनंद को अक्टूबर में देश का नया रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया.

क्यों मांगनी पड़ी माफी?

कनाडाई सशस्त्र बल यौन शोषण या भेदभाव का शिकार रहे मौजूदा और पूर्व सदस्यों का भरोसा वापस हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. रक्षा मंत्री आनंद, चीफ ऑफ स्टाफ जनरल वायने इयरे और उप रक्षा मंत्री जोडी थॉमस ने सरकार की तरफ से उन महिलाओं और पुरुषों से माफी मांगी जो सेना में यौन शोषण, यौन दुर्व्यवहार और भेदभाव का शिकार बने.

राष्ट्रीय रक्षा मुख्यालय में सरकार ने मांगी माफी

राष्ट्रीय रक्षा मुख्यालय से ऑनलाइन प्रसारित हुए कार्यक्रम में सरकार ने माफी मांगी. रक्षा मंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा, ‘हमारे कनाडाई सशस्त्र बलों के सदस्यों ने देश की सेवा कर हमेशा अपने आप से पहले सेवा को रखा है.’ उन्होंने यह भी कहा कि सेना के पास हमेशा कनाडाई लोगों का समर्थन रहा और हम हमेशा आपके रहेंगे. उन्होंने कहा, ‘रक्षा मंत्री के तौर मैं कनाडा की सरकार की ओर से आप से माफी मांगती

भेदभाव से निपटने में असफल

रक्षा मंत्री ने कहा, ‘मैं उन हजारों कनाडाई लोगों से माफी मांगती हूं जिन्हें इसलिए नुकसान पहुंचाया गया क्योंकि आपकी सरकार ने आपकी रक्षा नहीं की और न ही हमने यह सुनिश्चित किया कि न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सही व्यवस्था स्थापित हो. आपकी सरकार सेना तथा विभाग में यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और लिंग के आधार पर भेदभाव से निपटने के प्रयासों में विफल रही.’

यौन उत्पीड़न से 60% महिलाएं पीड़ित

रक्षा मंत्री ने कहा, ‘चीजें बदल सकती हैं, वे बदलनी चाहिए और वे बदलेंगी.’ आनंद ने शीर्ष सैन्य अधिकारियों के बीच ऐसे दुर्व्यवहार से निपटने के लिए ज्यादा कुछ न करने पर आलोचनाओं का शिकार बने हरजीत सज्जान के स्थान पर अक्टूबर में रक्षा मंत्री का पद संभाला. ऐसा अनुमान है कि यौन उत्पीड़न से 60 प्रतिशत पीड़ित महिलाएं हैं.

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