मनरेगा: जॉब कार्ड धारकों का होगा सत्यापन, अपात्र होंगे ब्लैक लिस्टेड

शाहजहांपुर। ग्रामीण क्षेत्र में गरीब तबके की आजीविका का सहारा बनी मनरेगा योजना में अपात्र भी सेंध मारी कर रहे हैं। गत वर्ष लॉकडाउन के दौरान जिले में कराए सत्यापन में 7500 से अधिक जॉब कार्ड विभिन्न कारणों से निरस्त किए जा चुके हैं। हाल ही में बरेली समेत प्रदेश के कई जनपदों में शिकायतों के आधार पर कराए गए सत्यापन में तमाम अपात्र पाए गए जॉब कार्ड धारकों को विभागीय पोर्टल पर टैग (ब्लैक लिस्टेड) किया गया है। इसे देखते अब जनपद में भी जॉब कार्ड धारकों का ब्लॉक स्तर पर दोबारा सत्यापन कराया जाएगा।

श्रम विभाग द्वारा कुछ वर्ष पहले कराए गए सर्वे के अनुसार जिले में करीब चार लाख से अधिक खेत मजदूर होने का अनुमान है। यह सभी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं और उनकी आजीविका कृषि और ग्रामीण विकास के कार्यों से जुड़ी है। इनमें से तीन लाख 65 हजार, 375 खेत मजदूरों को जॉब कार्ड देकर 100 दिन रोजगार गारंटी वाली मनरेगा योजना से जोड़ा गया है, लेकिन इनमें वर्तमान में केवल दो लाख, 57 हजार, 414 जॉब कार्ड धारक सक्रिय हैं। कोरोना काल में मनरेगा योजना इन सभी खेत मजदूरों की आजीविका का प्रमुख आधार रही, लेकिन उस दौरान तमाम कारखाने और दफ्तर बंद होने पर शहरों से प्रवासी मजदूरों का अपने गृह जनपदों की ओर पलायन शुरू हुआ तो मनरेगा में काम मांगने वालों की बाढ़ आ गई।
कोरोना काल में तमाम ऐसे प्रवासी कामगारों ने भी परिवार पालने के लिए मनरेगा में दिहाड़ी कमाने में दिलचस्पी दिखाई जो पढ़े लिखे होने के कारण बाहर कुशल श्रमिक के तौर नौकरी कर रहे थे। ऐसे करीब आठ हजार प्रवासी श्रमिकों को मनरेगा में विभिन्न श्रेणियों के 1786 कार्यों से जोड़ने के लिए उन्हें जॉब कार्ड दिलाने के साथ ही पुराने जॉब कार्ड धारकों का सत्यापन भी कराया गया। इस दौरान करीब 7500 ऐसे जॉब कार्ड धारक पाए गए, जिनकी मृत्यु हो गई, स्थान परिवर्तन हो गया या फिर जिनके दोहरे जॉब कार्ड बने पाए गए। ऐसे सभी कार्ड निरस्त होने के बावजूद अधिकारियों को संदेह है कि अभी भी तमाम लोग पात्र नहीं होने के बावजूद जॉब कार्ड रखे हुए हैं। सत्यापन में इन सभी की पहचान कर उन्हें काम देने पर रोक लगाई जाएगी।
रोजगार अथवा काम मांगने वाले किसी व्यक्ति को जॉब कार्ड देने से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि मनरेगा योजना लोगों को रोजगार की गारंटी देती है। इसके बावजूद ऐसे तमाम लोग हो सकते हैं जो आवश्यकता नहीं होने पर भी जॉब कार्ड लिए बैठे हैं। गत वर्ष करीब 7500 जॉब कार्ड निरस्त किए जा चुके हैं। कुछ लोगों ने जॉब कार्ड बने होने के बावजूद ब्लॉक स्तर पर लगे कैंपों में दोबारा जॉब कार्ड बनवा लिए। यदि किसी जॉब कार्डधारक की मौत हो चुकी है तो उसके बेटे को नियमानुसार वही कार्ड स्थानांतरित किया जाएगा। जून के पहले सप्ताह से शुरू होने वाले सत्यापन कार्य में निष्क्रिय श्रेणी के जॉब कार्ड धारकों को विशेष रूप से जांच के दायरे में लाया जाएगा।
-मो. हसीब अंसारी, मनरेगा उपायुक्त

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