भुगतान के नाम पर 20 से 30 फीसदी तक होती है वसूली

आशा वर्करों ने मानदेय भुगतान के लिए बाउचर प्रणाली की जगह सीधा तरीका निकालने, न्यूनतम वेतन व राज्य स्वास्थ्य कर्मी के रूप में शासन की स्वीकृति देने की मांग उठाई है। विधानसभा घेराव करने का एलान किया है।

उत्तर प्रदेश के हर केंद्र पर भुगतान के नाम पर 20 से 30 फीसदी तक उगाही की जा रही है। सरकार के पास आशा वर्करों के काम की योजना तो है, लेकिन उनके बेहतर जीवन की नहीं। ये समस्याएं रविवार को ऐक्टू से संबद्ध उप्र. आशा वर्कर्स यूनियन के राज्य स्तरीय कन्वेंशन में आशा वर्करों ने गिनाईं।

मौके पर आशा वर्कर्स ने मानदेय भुगतान के लिए बाउचर प्रणाली की जगह सीधा तरीका निकालने, न्यूनतम वेतन व राज्य स्वास्थ्य कर्मी के रूप में शासन की स्वीकृति देने की मांग उठाई। कन्वेंशन में मांगों को लेकर चार जून को प्रदर्शन और 12 सितंबर को विधानभवन घेराव का प्रस्ताव पारित किया गया।

यहां दारुलशफा में आयोजित कन्वेंशन में ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस के प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही ने कहा कि प्रदेश में ऐसा कोई केंद्र नहीं है जहां पर भुगतान के नाम पर उगाही न की जाती हो।

एक आकलन के मुताबिक प्रति वर्ष आशा वर्करों को मिलने वाले मानदेय राशि से करीब 200 करोड़ रुपये आशाओं से घूस के रूप से ले ली जाती है। यूनियंस की राज्य सचिव साधना पांडेय ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में असंभव कार्यों को संभव बना रही आशा कर्मियों की बात कोई सुनने वाला नहीं है।

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